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Monday, October 6, 2008

रह जाता ब्रह्मचारी

मेरे घर हर दो चार दिन बाद
एक तूफान आता है।
लड़ती हैं महिलाएं
लेकिन नुकसान हर बार
मेरा कर जाता है।

मैनें देखा है अक्सर
बिना किसी कारण के भी
वह लड़्ने का कारण ढूँढ लेती हैं।
आज तक समझ ना सका
ऐसा खेल वे
कैसे खेल लेती हैं।

सब से अजीब बात तो
तब होती हैं।
जब वे लड़्ती तो हैं आपस में,
पर मेरे सामनें बैठकर रोती हैं
दो दिन बाद फिर
एक ही बिस्तर पर सोती हैं।

उन का ये बार-बार का
रोना-धोना देख कर
मेरी समझ गई मारी।
अब सोच रहा हूँ
शादि ना करता
रह जाता ब्रह्मचारी।

Wednesday, September 24, 2008

मुझे लगता है अब यह भी.......


एक बार एक गाँव के पास शास्त्रीय संगीत सम्मेलन हो रहा था। उस सम्मेलन में बड़े-बड़े संगीतज्ञ अपना गायन सुना रहे थे।एक बहुत बड़े संगीतज्ञ्य ने जब अपना गायन शुरू किया तो कुछ ही देर के बाद वहाँ गाँव की बैठी एक बुढिया ने पहले तो सिसकियां लेनी शुरू कर दी.... फिर जैसे -जैसे गायन तेज होता गया वह सुबकनें लगी...जब गायन और चरम पहुँचा तो वह जोर-जोर से रोनें लगी। यह सब देख कर वहाँ बैठे अन्य संगीज्ञयों ने उस बुढीया से रोनें का कारण पूछा तो उसनें कहा कि कुछ दिन पहले उस का एक बहुत प्यारा बकरा मर गया था। इस पर उन्होनें पूछा बकरा तो कुछ दिन पहले मरा था, लेकिन तुम अब क्यों रो रही हो? उस बुढिया ने बताया कि मेरा बकरा भी मरनें से पहले ऐसे ही शोर मचा- मचा रहा था, जिस तरह यह गानें वाला मचा रहा है। इसी लिए मुझे रोना आ रहा है। क्यों कि मुझे लगता है अबयह भी.......