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Wednesday, July 25, 2007

पराविज्ञान परिचर्चा

क्या भूत-प्रेत व आत्माएं होती हैं ? आप क्या विचार रखते हैं ?
क्या मंत्रो मे शक्ति होती है?

सभी ध्रर्म-ग्रन्थ आत्मा का अस्तिव स्वीकार करते हैं । श्रीगीता में भगवान श्रीकॄष्ण ने आत्मा को अजर-अमर माना है ।कुरान ऒर बाइबल भी आत्माओं को स्वीकारते हैं। फिर भी भूत-प्रेतों,जिन्नों को माननें वालों को अन्धविश्वाशी कहा जाता है ।क्या धर्मग्रन्थों की कही बातें झूठी हैं? कृपया बताएं ।

मै इस की जानकारी चाह्ता हूँ । इसी लिए मैनें इस प्रश्न को परिचर्चा में भी उठाया है । क्यूँकि हम जिन धार्मिक ग्रन्थों का संम्बल लेकर चल रहे हैं उन की कसोटी इस बात पर निर्भर करती है कि ये कही बातें सत्य है या असत्य । आज इन बातों को गंभीरता से लेना होगा । इसे मात्र अंधविश्वास कहना गलत होगा । इन्हें गलत कहनें का सीधा अर्थ होगा कि जिस का संम्बल लेकर हम चल रहे हैं वह सब भी गलत है। हमारे धार्मिक ग्रंथ मंत्रों से भरे पडे़ हैं ।जैसे- गायत्री मंत्र, प्रणव मंत्र और भी ना जानें हजारो-हजार मंत्र भरे पड़े हैं हमारे ग्रन्थों में । साथ में इस बात का भी दावा है कि मंत्रों में शक्ति होती है । इनसे आपकी कई समस्याओं का समाधान भी होता है । क्या ये असत्य है ? यदि ये सब गलत है तो हम किस दिशा की ओर जा रहे हैं ? तब हमारी आस्था का क्या होगा ?

आप सोच रहे होगें आज कम्पयूटर के युग में मैनें कौन-सा विषय चुना है । मेरा इस विषय को चुननें का कारण मात्र इतना है कि मैं इसे अन्धविश्वास नही मानता, बल्कि इसे भी एक विज्ञान मानता हूँ ।मंत्र विज्ञान वास्तव में ध्वनि-विज्ञान है,जो विभिन्न प्रकार की ध्वनियों को एक विशेष संयोजन मे रखकर उच्चारित करनें से एक विशेष प्रकार की शक्ति का प्रभाव उत्पन्न कर देता है जो हमारे अनुकूल परिस्थितयाँ उत्पन्न करनें में सहायक होता है।अब यह साधक के विवेक पर निर्भर करता है कि वह इस शक्ति का प्रयोग कैसे करे।
आईए सब मिल कर इस परिचर्चा मे हिस्सा लेकर अपना-अपना विचार रखे।
कृपया निम्न लिकं पर जाएं-



http://www.akshargram.com/paricharcha/viewtopic.php?id=810

http://www.akshargram.com/paricharcha/viewtopic.php?id=1069