Wednesday, January 18, 2012

शराब चीज ही ऐसी है....

शराब के कारण कुछ समय पहले ही किसी जवान की मौत ने मुझे हिला कर रख दिया था। लाख मना करने पर भी वह इसे छोड़ नही सका।आज उसके परिवार को देखता हूँ तो उसे कोसनें लगता हूँ......अपनी मौज मस्ती व खराब आदत के कारण जाने वाले तो चले जाते हैं....लेकिन पीछे जो रह जाते हैं क्या उनका ध्यान  कभी इस ओर  नही जाता....कि उनके जाने के बाद इनपर क्या गुजरेगी। इस गजल को सुनकर तो ऐसा ही लगता है.......






5 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

सही है!

NISHA MAHARANA said...

sahi bat hai pr pinevale samjhe tb bat bnegi.

Pallavi said...

सत्य वचन ...

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

पहले आदमी शराब को पीता है और फिर शराब आदमी को डुबो देती है॥

Kailash Sharma said...

बिलकुल सच...

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