Monday, December 14, 2009

मुस्कराहट.....

एक पैकेट में ७ बन(ब्रेड) हैं.

मेरी पत्नी रोज आधा खाती है और मैं एक पूरा.

पहेली है कि ५ वें दिन कौन कितना खायेगा? (समीर जी की पोस्ट से साभार)

यदि पत्नी मेरी हुई तो....

पहले दिन ही पैकेट खत्म हो जाएगा।

स्त्री/ पुरूष विमर्श धरा रह जाएगा।

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एक पत्नी बोली -
मैं अपने पति को चार रोटियां खिलाती हूँ
लेकिन खुद एक ही खाती हूँ।
दूसरी ने कहा-
अच्छा है ,पति- धर्म ऐसे ही निभाया जाता है।
चार की एक और एक को चार जब बनाया जाता है।

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एक पत्नी ने दूसरी से कहा-
मेरे पति कभी किसी को
आँख उठा कर भी नही देखते....
दूसरी ने कहा-
बहन, मैं यह बात जानती हूँ और मानती हूँ ....
तुम्हारे पति से किसी औरत का कद बड़ा हो ही नही सकता।

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Thursday, November 5, 2009

ऐ क्या तू बोलती....


इन से मिलो..
कुछ भी तुम
कह ना पाओगे..
वर्तमान को तुमने सजाया है...
भविष्य अब ऐसा ही पाओगे...


मेरा मन तेरा प्यासा............

इन से मिले
ये हैं कल के
उभरते कलाकार......
जिन्हें लाए हैं
य़ू टयूब से साभार...
इन के बारे में
आपका क्या है विचार..


Tuesday, October 27, 2009

क्या यह मैने सही फैसला किया?.....मुझे बताएं।

कई बार इन्सान के सोचे सपने सच हो जाते हैं। ऐसा मैं पहले तो कभी नही सोचता था लेकिन जब आपको पता लगे की आप को लाखों का धन अचानक प्राप्त हो गया है तो आदमी के मन की अवस्था कैसी हो जाती है।जब बैठे बिठाए इतना धन आपको मिल जाए तो दिमाग हजारों सपने बुनने लगता है कि वह इस धन का कहाँ कहाँ कैसा इस्तमाल करेगा।इस धन को प्राप्त कर मेरा भी यही हाल हो गया है.....समझ नही आ रहा इस धन का क्या करूँ।लेकिन जिन लोगो के कारण यह धन मुझे मिला ,यह धन उन्हीं के सहयोग से इस का सही उपयोग करने के लिए मैने उन्हें अपना विचार बता दिया है।आप भी उसे पढ़े.....और बताए क्या मेरा उठाया गया यह कदम सही है?????

प्रिय मित्रेश्वर,

आप का धन्यवाद। जैसा कि आपने बताया कि मेरा sum of £950.000.00 in LG Promo अवार्ड निकला है।मुझे यह जान कर बहुत खुशी हुई। मैं जब भी आसपास गरीबो को देखता हूँ तो मन बहुत दुखी होता था ।तब मै सोचता था कि काश! मेरे पास धन होता तो मै इन की मदद कर पाता। लेकिन मेरे पास कभी भी इतना धन नही आया की मैं अपने मन की इच्छा पूरी कर सकूँ। लेकिन आपने यह अवार्ड देकर मुझ पर बहुत उपकार किया है। अत: मैं चाहता हूँ कि मुझे जो अवार्ड आप देना चाहते हैं,उस की सारी धनराशी....जो टेक्स आदि दे कर शेष बचती है। वह गरीबो में बाटँ दे।यदि आप ऐसा करेगें तो मेरे मन को बहुत शांती मिलेगी।आप के इस नेक काम में सहायता करने के लिए मै भी आपका सदा आभारी रहूँगा।आशा है आप यह कार्य शीघ्र ही कर देगे। इस लिए आपको अग्रिम धन्यवाद दे रहा हूँ।





आपका अपना
परमजीत बाली

प्रमाण स्वरूप प्राप्त ईमेल का चित्र भी ऊपर दिया जा रहा है।

Sunday, October 11, 2009

बागी सामंत कौन.???

\    Buhjo to jaane\

Sunday, August 30, 2009

आप के कंप्यूटर पर ये हमला कर सकता है....

Tuesday, August 18, 2009

SIKH JOINED PAKISTAN TRAFFIC POLICE

बी बी सी द्धारा एक समाचार मे कहा गया है कि एक सिख को पकिस्तान में ट्रैफिक पुलिसमेन की नौकरी दी गई है और उस को उसी तरह सुविधाएं प्रदान की गई हैं जिस प्रकार एक सिख को चाहिए होती हैं।आज जब बहुत से यूरोप के देश सिखों के पहनावें,धार्मिक मान्यताओं पर प्रतिबंध लगा रहे हैं वहीं धर्म के आधार पर बना पाकिस्तान का इस तरह का व्यवाहर काफी आश्चर्यजनक लग रहा है!!!


Sunday, July 19, 2009

हम किसी से कम नहीं

Friday, June 19, 2009

शनि देव से मिलिए

Friday, May 1, 2009

सपना जो सिर्फ मेरा हो


फिर मरेगा। जानता हूँ कभी अपनी पूरी उमर उसने कब जी है।बस! जन्मता है और फिर मौत की ओर बढने लगता है।मैं सोचता ही रह जाता हूँ कि कुछ समय बाद इसे सवाँर सजा कर सब के सामने रख दूँगा।लेकिन क्या कभी हमारा सोचा पूरा होता है?..हाँ शायद कभी कभी हो जाता है..लेकिन जब तक वह पूरा होता है तब तक अपनी इच्छा ही मर जाती है। ऐसे मे उस का पूरा होना ना होना कोई महत्व नही रखता।
अभी कुछ दिनो की ही तो बात है मैनें सोचा मैं वह सब करूँ जो मेरे भीतर चलता है। मैनें कोशिश भी की ।लेकिन मेरे दोस्तों ने कहा ......यह क्या कर रहे हो? ......यह तुम्हारे से मेल नही खाता...........हमे तुम से यह आशा नही थी कि तुम इस तरह भी कर सकते हो।............अब ऐसे में मैं बेबस हो जाता हूँ.....सोचता हूँ यदि अपने मन की करूँ तो दोस्त छूटते हैं.......और ना करूँ तो अपने भीतर उठते सपनों को...उमंगो को मारना पड़ता है। यह क्रम हरेक के जीवन में शायद ऐसे ही चलता रहता है। हम करने और ना करने के बीच और कभी ना कर पाने की जद्दोजहद मे ही अपने आप को फँसा पाते हैं।
बस! ऐसे ही तो हमारे सपने मरते जाते हैं....और हम नित नये सपनों को सजाते है.........जिनमे कुछ लोग ही ऐसे खुश किस्मत होते हैं जिन के सपनों को कोई मंजिल मिल पाती है।.....क्या कभी आपने ऐसा सपना पूरा करने की कभी सोची है जो सिर्फ तुम्हारा ही हो.....जिस मे दूसरा कोई शामिल ना हो ?...... जिसे सिर्फ तुम अकेले ही जीना चाहते हो.............मैं उसी सपने की तलाश मे हूँ.................यदि आप को वह कहीं मिल जाए तो मुझे जरूर बताना।.........

Friday, March 20, 2009

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Monday, February 9, 2009

ऐसे ट्रेनिंग दी जा रही है..............

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Saturday, January 31, 2009

आँसू


उन की आँख के
आंसू देख कर
हम ने पूछा-
किस कि याद आई है?
ये पीड़ा किस से पाई है?
वह बोली-
आज कल
सब्जी महँगी हो गई है।
इसी लिए
मिर्ची से रोटी खाई है।