प्रिय ब्लोगर मित्रों,मुझे उन ब्लोगर मित्रों से शिकायत है। जो अपने ब्लोग पर" शब्दपुष्टिकरण" को लगा कररखते हैं।जिस कारण टिप्पणी करनें वाले को काफी परेशानी होती है।ऐसे में टिप्पणी करने वाले का दोगुना समयलगता है।यह बात मुझे स्वयं टिप्पणियां करते समय अनुभव हुई। कई बार पोस्ट पढने के बाद कुछ टिप्पणी करने को मन करत है लेकिन जब शब्दपुष्टिकरण देखते हैं तो बिना टिप्पणी किय ही लौट जाते हैं।जिस से आप को टिप्पणी नही कर पाता।अत: उन ब्लोगर मित्रों से निवेदन है कि वे अपनें ब्लोग पर शब्दपुष्टिकरण ना लगाएं।
इसे हटाने के लिए आप अपने ब्लोग की सेटिग्स पर जाएं।फिर जहाँ टिप्पणियां लिखा है उसे किलकाएं।उस के बाद जहाँ लिखा है टिप्पणियों के लिए शब्दपुष्टिकरण दिखाएं उस के सामनें ही हाँ और नहीं लिखा है।वहाँ पर आप नहीं पर किलकाएं और फिर सेंटिग्स सहेजें पर किलकाएं।बस यह पुष्टिकरण हट जाएगा।यदि आप यह करते हैं तो मैं आप का आभारी रहूँगा :)
नोट:- यह लेख उन के लिए है जो नहीं जानते।
Tuesday, September 30, 2008
Friday, September 26, 2008
कयामत के दिन
रोना सुन लोगों का
कविता भूल रहा हूँ।
नेता के वादों संग
हवा में झूल रहा हूँ।
बिना सिर- पैर की कविता
लिखनें को जी करता है,
क्यू बेकसूर नित मरते,
नेता नही मरता है ?
अरे नासमझ आतंकी !!
हम- तुम को सतानें वाले,
कही ओर हैं बैठे।
बेकसूरों संग भैईए
क्यूँ तुम हो ऎठें।
फोडना है तो
उन का सिर
जा कर के फोड़ो।
जिन की कृपा से बना गधा,
जो कभी था घोड़ो ।
रब का नाम ले जिसने
तुझ को भरमाया।
इस राह पर चल कर तुझे
मिलेगा उस का साया।
क्यूँ नही तू इस राह पर चल ,
उस को पा लेता।
इस राह पर चलनें से पहले
पूछ तो लेता।
मार-मार कर
इक दिन तू भी मर जाएगा।
कयामत के दिन बैठ
बहुत फिर पछताएगा।
Wednesday, September 24, 2008
मुझे लगता है अब यह भी.......

एक बार एक गाँव के पास शास्त्रीय संगीत सम्मेलन हो रहा था। उस सम्मेलन में बड़े-बड़े संगीतज्ञ अपना गायन सुना रहे थे।एक बहुत बड़े संगीतज्ञ्य ने जब अपना गायन शुरू किया तो कुछ ही देर के बाद वहाँ गाँव की बैठी एक बुढिया ने पहले तो सिसकियां लेनी शुरू कर दी.... फिर जैसे -जैसे गायन तेज होता गया वह सुबकनें लगी...जब गायन और चरम पहुँचा तो वह जोर-जोर से रोनें लगी। यह सब देख कर वहाँ बैठे अन्य संगीज्ञयों ने उस बुढीया से रोनें का कारण पूछा तो उसनें कहा कि कुछ दिन पहले उस का एक बहुत प्यारा बकरा मर गया था। इस पर उन्होनें पूछा बकरा तो कुछ दिन पहले मरा था, लेकिन तुम अब क्यों रो रही हो? उस बुढिया ने बताया कि मेरा बकरा भी मरनें से पहले ऐसे ही शोर मचा- मचा रहा था, जिस तरह यह गानें वाला मचा रहा है। इसी लिए मुझे रोना आ रहा है। क्यों कि मुझे लगता है अबयह भी.......