Saturday, January 31, 2009

आँसू


उन की आँख के
आंसू देख कर
हम ने पूछा-
किस कि याद आई है?
ये पीड़ा किस से पाई है?
वह बोली-
आज कल
सब्जी महँगी हो गई है।
इसी लिए
मिर्ची से रोटी खाई है।

10 टिप्पणियाँ:

राज भाटिय़ा said...

वाह क्या बात है...:) हाय हाय यह मजबुरी...

Mrs. Asha Joglekar said...

सी सी.... हाय हाय ।

Mahesh Prakash Purohit said...

aapne sahi kahaa!! prakriti ka bahut hi sundar varnan hai !!! dhanyavad...
Mahesh

the pink orchid said...

aapne mehngaayi pur bada hi tagda prahaar kar dala...mahngaayi ke bhi aansu nikal aaye.. :)

kabhi fursat mein mere blog par tashreef laayein aur mujhe kuchh seekhne ka mauka dein
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Science Bloggers Association of India said...

सुन्दर क्षणिका।
देखन में छोटी लगी, घाव किया गम्भीर।

COMMON MAN said...

हाहाहाहा, सटीक

दिगम्बर नासवा said...

परमजीत जी
थोड़े से शब्दों में इतनी गहरी बात...........साधुवाद
ये तमाचा है आज के हालत पर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

दुख हो या सुख की शहनाई बजतीं हो,
आँसू कथा-व्यथा,सबकुछ कह जाते हैं।
मँहगाई के हों, या मिर्च-मसालों के,
आँसू अँखियों से बरबस बह जाते हैं।।

varsha said...

बहुत खूब.. प्याज का भी यही काम है!

Harkirat Haqeer said...

Ye Mirchi ka falsfa axxha lga...!

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