Wednesday, January 5, 2011

भाईचारा



जब- जब
देश में दंगे होते हैं

हमारे नेता-
अपने-अपने लोगो से कहते हैं-
भाईचारा रखें।
उन के अनुयायी
हमेशा ऐसा ही करते हैं।
सदा इसका ही दम भरते हैं।


मुस्लिमों के लिये
हिन्दू भाई 
चारा बन जाते हैं
और हिन्दू भाईयों के लिये 
मुसलमान भाई 
चारा बन जाते हैं।
हमारे ये नेता
इसी तरह भाईचारा फैलाते हैं।
फिर हमारी बेवकूफियों पर मुस्कराते हैं।

5 टिप्पणियाँ:

राज भाटिय़ा said...

आप की बात से सहमत हे बहुत सुंदर बात कही आप ने अपनी इस कविता मे. धन्यवाद

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत खूब ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" said...

बहुत सटीक सटायर!

निर्मला कपिला said...

बिलकुल सटीक व्यंग है। बधाई।

दीप्ति शर्मा said...

bahut khub
.....

mere blog par
"main"
kabhi yaha bhi aaye

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