जरा सोचिए  

Friday, March 14, 2008

इस में छिपे संदेश के बारे में आप क्या कहते हैं-

AddThis Social Bookmark Button
Email this post


2 टिप्पणियाँ: to “ जरा सोचिए

  • Dr. Chandra Kumar Jain
    March 16, 2008 10:28 PM  

    कोई नहीं पराया जग में
    धरती रैन बसेरा है .
    इसकी सीमा पश्चिम में
    तो मन का पूरब डेरा है .
    गलियाँ गाँव गूंजाता चल
    सबको गले लगाता चल
    हर दरवाज़ा प्रभु दुआरा
    सबको शीश नवाता चल.

    नीरज जी की हैं पंक्तियाँ.

  • Suresh Chandra Gupta
    July 20, 2008 1:09 PM  

    हाथ फिसल गया, बाकई. बहुत सही.

Design by Amanda @ Blogger Buster