नोट:- यह एक हास्य कविता है कोई इसे अन्यथा ना ले। सुबह उठते ही पत्नी चिल्लाई- आज करवा चौथ है, आज मेरा व्रत है। हम मन मे सोच रहे थे। क्यूँ हरेक पति अपनी अपनी बीबी से त्रस्त है।
बीबी ने शायद हमारे मन की बात पढ ली- बोली- तुम्हारी लम्बी उमर के लिए यह व्रत करती हूँ। तुम्हारे लिए ही तो सारा दिन भूखी मरती हूँ।
हम मन में सोच रहे थे हमारे लिए कहाँ...? यह व्रत अपने सुख के लिए करती हो। जब तक हम जिन्दा हैं तभी तक यह ठाठ करती हो।
हमारे जानें के बाद यह बहुएं और बैटे तुम्हे रोज जबरद्स्ती व्रत करवाएंगे। उस समय हम तुम्हें बहुत याद आएगें।
पहले कश्मीर अब असम में भी पाक झंडा उठाया जा रहा है।हमारे देश के कर्ण धार वोटों की राजनिति की खातिर आँखें बन्द किए बैठे हैं।हम तो बस सिर्फ विरोध चीख ही सकते हैं,लेकिन क्या हमारे चिल्लानें का असर हमारे देश के कर्णधारों पर कभी पड़ता है?
चंद सिरफिरों की हरकतें,चंद सिरफिरों का जनून। बर्बाद कर रहा है, मेरे देश का कानून। वोट की खातिर, मेरे नेता असूल बदलें, लगता है धीरे-धीरे सफेद हो रहा है खून।
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कुर्सियों की खातिर जलवा रहे तिरंगा। शर्म नही आती,रोज हो रहा है दंगा। जा कर इन्हें जगाओ,बेगैरतों को, देश का ये नेता क्यूँ, सोच से है नंगा।
आज सुबह नीदं देर से खुली लेकिन उठते ही हम ने पत्नी को दी- "दशहरे की बधाई।" यह सुन पत्नी चिल्लाई- ओ कुम्भंकरण के भाई! आज छुट्टी है तो क्या पड़े-पड़े खाट तोड़ोगे। उठकर काम मे हाथ बटाओं, शाम होने से पहले ही तुम दोस्तों संग दशहरा देखने दोड़ोगे।
हमने कहा- हमें रावण का भाई मत कहो, हम तो रामजी के पद चिन्हों पर चलते हैं। पत्नी बोली- रहने दो। आज सभी पुरूष राम के नाम पर हम अबलाओं को छलते हैं। हमने पूछा- हमने कब छला जरा बतला दो। वह बोली - सदियों से हमे अर्धागनी कहते हो, अब बराबरी का हक भी दिलवा दो। हमने तेश मे आकर कहा- जाओ !आज से हमने तुम्हें , बराबरी का हक दिया। अब क्या कहती हो बता दो। वह बोली- ठीक है, अब जरा चुन्नु-मुन्नु को नहला दो। अब अपनी बात पर कैसे टिके रहे? भाईयों जरा बता दो। हमारी इस अधुरी कविता को कोई पूरा करवा दो।
खेलो क्रिकेट पेलो क्रिकेट, बैठ निठल्ले झेलों क्रिकेट। हर बारी पिट जाए तो क्या ? बार-बार तुम ठेलो क्रिकेट। हार -हार कर फिर हारेगें, लेकिन भैया छोड़ ना क्रिकेट। इसके लिए सारी जनता पागल, देश को कभी कुछ हुआ ना हासिल, फिर भी प्यारे खेल तू क्रिकेट। तुझे गुलामी की निशानी अंग्रेजों से मिली है क्रिकेट। राट्रीय भाषा तू छोड़ के बैठा पसंद करे अग्रेजी गिट पिट। खेल तू क्रिकेट। खेल तू क्रिकेट। बेशर्मी से खेल तू क्रिकेट। देश का धन औ’ समय गँवा कर। नेताओ की जेबें भर, भर। जनता को करने दे टर- टर। मगंन रहो बस खेलो क्रिकेट। खेलो क्रिकेट। खेलो क्रिकेट।