Tuesday, October 28, 2008

चंद मुक्तक

सिर्फ यादो के सहारे जो जिया जाता।
बिन सुई-धागे गर कुछ सिया जाता
जिन्दगी कितनी हसीं हो जाती,
रोशन बिना बाती ये दीया होता।

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याद उनकी जब भी आती है|
बेवफा थे, यही बताती है |
भूलना फिर भी उनको मुश्किल है,
यही बात हमको सताती है|

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याद उनकी क्यों जाती ही नही |
आँख को
कोई शै भाँती ही नही।
या रब बता ये माज़रा क्या है,
अपने लिए बहार आती ही नही।

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1 टिप्पणियाँ:

vinay k joshi said...

बहुत अच्छे शब्द है,
दीपावली की शुभकामनाये |
सादर,
विनय के जोशी

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